सुरीली अखियों वाले, सुना है तेरी अखियों से
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2/25/20261 मिनट पढ़ें
सुरीली अखियों वाले, सुना है तेरी अखियों से
बहती हैं नींदें और नींदों में सपने
कभी तो किनारों पे उतर मेरे सपनों से
आ जा ज़मीं पे और मिल जा कहीं पे
मिल जा कहीं...
ओ ओ ओ... ओ ओ ओ...
मिल जा कहीं, समय से परे
समय से परे, मिल जा कहीं
तू भी अखियों से कभी
मेरी अखियों की सुन
सुरीली अखियों वाले, सुना है तेरी अखियों से।
जाने तू कहाँ है उड़ती हवा पे
तेरे पैरों के निशान देखे
जाने तू कहाँ है उड़ती हवा पे
तेरे पैरों के निशान देखे
ढूँढा है ज़मीं पे, छाना है फलक पे
सारे आसमान देखे
मिल जा कहीं, समय से परे
समय से परे, मिल जा कहीं
तू भी अखियों से कभी
मेरी अखियों की सुन।
हर बार जब मैं तेरी आँखों में देखूँ
मुझे अपना स्वर्ग दिखे
आसमान में चमकते तारे
ख्वाहिशों की दुनिया रचें
क्या ये हकीकत है
क्या तू ही मेरे लिए है
तूने मेरे मन, दिल और रूह को छू लिया
तू ही है जिसका इंतज़ार है...
ओट में छुपके देख रहे थे
चाँद के पीछे-पीछे थे
ओट में छुपके देख रहे थे
चाँद के पीछे-पीछे थे
सारा जहाँ देखा, देखा ना आँखों में
पलकों के नीचे थे
आ चल कहीं, समय से परे
समय से परे, चल दे कहीं...
तू भी अखियों से कभी
मेरी अखियों की सुन
सुरीली अखियों वाले, सुना है तेरी अखियों से
सुरीली अखियों वाले, सुना दे ज़रा अखियों से
सुरीली अखियों वाले, सुना है तेरी अखियों से।
“Surili Akhiyon Wale” को यदि आध्यात्मिक दृष्टि से समझें, तो यह केवल प्रेमी-प्रेमिका का गीत नहीं रह जाता, बल्कि जीव (आत्मा) और परमात्मा के मिलन की तड़प बन जाता है। यह भक्ति, ध्यान और आत्मबोध की गहरी यात्रा का प्रतीक है।
नीचे इसके कुछ गहरे आध्यात्मिक अर्थ समझते हैं:
1. “सुरीली अखियों वाले” — दिव्य चेतना का आह्वान
यहाँ “सुरीली अखियाँ” सामान्य आँखें नहीं हैं।
यह परमात्मा की करुणा-भरी दृष्टि या गुरु की दिव्य दृष्टि का प्रतीक हो सकती हैं।
· “तेरी अखियों से बहती हैं नींदें और नींदों में सपने”
➤ परमात्मा की कृपा से ही जीव को शांति (नींद) और जीवन के उद्देश्य (सपने) मिलते हैं।
➤ आध्यात्मिक रूप से, यह माया की नींद भी हो सकती है जिसमें जीव संसार के सपनों में उलझा है।
2. “कभी तो किनारों पे उतर मेरे सपनों से” — आत्मा की पुकार
यह पंक्ति आत्मा की पुकार है:
“हे प्रभु! मेरे कल्पनाओं और ध्यान में ही नहीं, प्रत्यक्ष अनुभव में भी आओ।”
· “आ जा ज़मीं पे”
➤ साधक चाहता है कि दिव्य अनुभव केवल ध्यान या कल्पना तक सीमित न रहे,
बल्कि जीवन के यथार्थ में उतर आए।
3. “मिल जा कहीं, समय से परे” — कालातीत मिलन
आध्यात्म में परमात्मा का अनुभव समय और स्थान से परे होता है।
· “समय से परे” का अर्थ है —
➤ जहाँ न भूत है, न भविष्य, केवल वर्तमान क्षण।
➤ वही स्थिति ध्यान (Meditative state) या समाधि की है।
यह मिलन किसी भौतिक स्थान पर नहीं, बल्कि अंतरात्मा की गहराई में होता है।
4. “ढूँढा है ज़मीं पे, छाना है फलक पे” — बाहरी खोज से आंतरिक यात्रा तक
मनुष्य परम सत्य को बाहर खोजता है —
तीर्थों में, ग्रंथों में, आकाश में।
पर गीत संकेत देता है:
➤ “सारा जहाँ देखा, देखा ना आँखों में, पलकों के नीचे थे”
यह अत्यंत गहरी पंक्ति है।
पलकों के नीचे अर्थात् —
ध्यान में, आँखें बंद करने पर,
वही परम सत्य भीतर मिलता है।
यह उपनिषदों की उस वाणी से मेल खाती है:
“तत्वमसि” — तू वही है।
5. अंग्रेज़ी पंक्तियों का आध्यात्मिक संकेत
“Everytime I look into your eyes, I see my paradise”
यह आत्मा का अनुभव है जब वह परमात्मा में स्वयं को देखती है।
परमात्मा अलग नहीं है —
वह हमारा ही शुद्ध स्वरूप है।
“Captured my mind, my heart, my soul”
➤ जब भक्ति परिपक्व होती है, तो साधक का मन, हृदय और आत्मा पूर्णतः ईश्वर में लीन हो जाते हैं।
6. चाँद और ओट का प्रतीक
“ओट में छुपके देख रहे थे, चाँद के पीछे-पीछे थे”
· चाँद = मन
· बादल/ओट = माया
· छुपकर देखना = ध्यान की अवस्था
साधक मन (चाँद) के पीछे भागता है,
पर सत्य तो “पलकों के नीचे” — भीतर है।
समग्र आध्यात्मिक संदेश
यह गीत बताता है कि:
· जीव परमात्मा को बाहर खोजता है।
· वह समय, स्थान और रूपों में उलझा रहता है।
· अंततः समझता है कि परम सत्य बाहर नहीं, भीतर है।
· जब आँखें बंद होती हैं, तभी असली मिलन होता है।
यह गीत भक्ति-योग, प्रेम-योग और ध्यान-योग — तीनों का सुंदर संगम है।
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